Posts

ले चल मुझे भुलावा देकर

ले चल वहाँ भुलावा देकर मेरे नाविक ! धीरे-धीरे ।                            जिस निर्जन में सागर लहरी,                         अम्बर के कानों में गहरी,                     निश्छल प्रेम-कथा कहती हो-                    तज कोलाहल की अवनी रे ।                  जहाँ साँझ-सी जीवन-छाया,               ढीली अपनी कोमल काया,            नील नयन से ...

रामधारी सिंह दिनकर ✍️✍️

#चल चला चल ... हो तिमिर कितना भी गहरा; हो रोशनी पर लाख पहरा; सूर्य को उगना पड़ेगा, फूल को खिलना पड़ेगा।  हो समय कितना भी भारी; हमने ना उम्मीद हारी; दर्द को झुकना पड़ेगा; रंज को रुकना पड़ेगा।  सब थके हैं, सब अकेले; लेकिन फिर आएंगे मेले; साथ ही लड़ना पड़ेगा; साथ ही चलना पड़ेगा। - रामधारी सिंह दिनकर     -योगेश कुमार "यायावर"

जीवन उदयन एक दास्ताक

जीवन उदयन एक दास्ता समय का दरिया बहता जाए, नव जीवन उदयन होता जाए। बहते-बहते कहता जाए जीवन एक संघर्ष है, जीवन एक संघर्ष है, अपनी बदनामियों के साये में रोज़ जीत हूँ, रोज़ मरता हूं, तुम मुझे भूल गयी हो, लेकिन में तुम्हे अब भी याद करता हूँ दिल कब तक ये सहता जाए जीवन एक संघर्ष है, जीवन एक संघर्ष है, जिन्हें एक पल को में नहीं भूला पाना चाहा सदा जिन्हें फिर से जिनकी यादों में गोते खाता रहा पाया और खो दिया उन्हें फिर से आँसू क्यों न बहता जाए जीवन एक संघर्ष है, जीवन एक संघर्ष है नव जीवन उदयन होता जाए। समय का दरिया बहता जाए बहते-बहते कहता जाए जीवन एक संघर्ष है, जीवन एक संघर्ष है, इस तरह जीने पर मजबूर हुए जिसको चाहा उसी से दूर हुए हमने जो प्यार के देखे सपने सारे शीशे की तरह चूर हुए, चूर हुए ग़म का लावा बहता जाए नव जीवन उदयन होता जाए। जीवन एक संघर्ष है, जीवन एक संघर्ष है समय का दरिया बहता जाए बहते-बहते कहता जाए जीवन एक संघर्ष है, जीवन एक संघर्ष है यकीन नहीं होता कि एक दिन मै भी शून्य था अब कुछ अंक हासिल किए । पर हौसले बुलंद थे संघर्ष भी कठिन था आफजाई एकमात्र सहारा था  जैसे नदियों का किनारा था डुब...